उत्तर प्रदेश में दाखिल खारिज (नामांतरण) कैसे कराएं
जमीन खरीदने, विरासत में मिलने या रजिस्ट्री के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नया नाम दर्ज कराना जरूरी है। यह प्रक्रिया आधिकारिक vaad.up.nic.in पोर्टल (राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली) पर पूरी होती है।
1. दाखिल खारिज (नामांतरण) क्या है
दाखिल खारिज, जिसे नामांतरण भी कहते हैं, वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके जरिए राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) में पुराने मालिक का नाम हटाकर नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 34 के अंतर्गत होती है।
जमीन खरीदने, विरासत (वरासत) में मिलने, दान में मिलने, या किसी अन्य तरीके से मालिकाना हक बदलने पर दाखिल खारिज कराना जरूरी है। अगर यह नहीं कराया जाता, तो खतौनी में पुराने मालिक का ही नाम दर्ज रहता है, जिससे भविष्य में दिक्कत आ सकती है।
2. नई व्यवस्था: रजिस्ट्री के बाद अपने आप दर्ज होता है वाद
नीचे दी गई प्रक्रिया रजिस्ट्री के बाद आवेदन प्रस्तुत करने की आधिकारिक विधि है, जो सीधे रजिस्ट्री संख्या और रजिस्ट्री दिनांक के आधार पर काम करती है।
3. जरूरी जानकारी
- रजिस्ट्री (बैनामा) की संख्या और रजिस्ट्री की तिथि।
- वह जनपद और निबंधन कार्यालय, जहां रजिस्ट्री हुई थी।
- आवेदक का सक्रिय मोबाइल नंबर, जिस पर OTP प्राप्त होगा।
- विरासत (वरासत) या दान के मामलों में संबंधित प्रमाण पत्र या दान पत्र की जानकारी।
4. ऑनलाइन आवेदन करने की आधिकारिक प्रक्रिया
यह प्रक्रिया राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली के आधिकारिक मैनुअल पर आधारित है।
- पोर्टल खोलें: ब्राउज़र में vaad.up.nic.in टाइप करके “राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली” के मुख्य पृष्ठ पर जाएं।
- विकल्प चुनें: “नामांतरण (दाखिल-खारिज) हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 34 के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन” के लिए क्लिक करें।
- OTP प्राप्त करें: जिस मोबाइल नंबर से आवेदन करना है, उसे दर्ज करें और OTP (वन टाइम पासवर्ड) प्राप्त करें।
- लॉगिन करें: प्राप्त OTP और स्क्रीन पर दिखाया गया कैप्चा दर्ज करके “लॉगिन करें” बटन पर क्लिक करें।
- रजिस्ट्री विवरण भरें: “निबंधन कार्यालय एवं रजिस्ट्री के विवरण” सेक्शन में अपना जनपद और निबंधन कार्यालय चुनें, फिर रजिस्ट्री संख्या और रजिस्ट्री दिनांक दर्ज कर “प्रदर्शित करें” बटन पर क्लिक करें।
- विवरण जांचें: इस तरह आपकी उस विशेष रजिस्ट्री/बैनामे का संपूर्ण विवरण स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगा।
- घोषणा और सुरक्षित करें: आवेदक या प्राधिकृत व्यक्ति अपना संपूर्ण विवरण भरकर नामांतरण/दाखिल खारिज के लिए उद्घोषणा करें, फिर “आवेदन सुरक्षित करें” बटन पर क्लिक करें।
- स्वतः पंजीकरण: प्रस्तुत आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार न्यायालय में स्वतः दर्ज हो जाता है, और नियमानुसार समयसीमा के भीतर पीठासीन अधिकारी द्वारा वाद का निस्तारण किया जाता है।
- आवेदन प्रिंट करें: “कुल दर्ज आवेदन पत्र” विकल्प से आप अपना जमा किया गया आवेदन प्रिंट कर सकते हैं।
5. आवेदन कब करें
अगर आपने अभी-अभी रजिस्ट्री कराई है, तो आवेदन करने से पहले कुछ समय रुकना बेहतर होता है, ताकि सिस्टम में रजिस्ट्री का रिकॉर्ड सिंक हो सके।
- बहुत जल्दी आवेदन न करें: रजिस्ट्री के तुरंत बाद आवेदन करने पर रिकॉर्ड सिंक न होने के कारण देरी हो सकती है।
- उचित समय: रजिस्ट्री के लगभग 30 से 45 दिन बाद स्टेटस चेक करना या आवेदन करना बेहतर रहता है।
- बहुत देर भी न करें: देरी होने पर अलग से जांच (inquiry) शुरू हो सकती है, इसलिए समय पर कार्रवाई करना जरूरी है।
6. फीस और कानूनी समयसीमा
आवेदन के साथ कोर्ट फीस स्टांप लगाना आवश्यक है। सटीक राशि मामले की प्रकृति (खरीद-बिक्री, वरासत, दान) और तहसील पर निर्भर कर सकती है, इसलिए आवेदन से पहले अपने संबंधित तहसील कार्यालय या राजस्व न्यायालय से पुष्टि जरूर करें।
| मामले का प्रकार | कानूनी समयसीमा (धारा 34/35) |
|---|---|
| अविवादित मामले (कोई आपत्ति नहीं) | 45 दिन के भीतर |
| विवादित मामले | 90 दिन के भीतर |
7. सहायता कहां से लें
नामांतरण आवेदन या वाद की स्थिति से जुड़ी किसी भी दिक्कत के लिए इन माध्यमों से संपर्क करें।
| संपर्क माध्यम | विवरण |
|---|---|
| CM हेल्पलाइन | 1076 (24 घंटे, निःशुल्क) |
| ईमेल | bhulekh-up@gov.in |
| लैंडलाइन | 0522-2217145 (राजस्व मंडल, लखनऊ) |